🚆 ट्रेन के टॉयलेट में बड़ा सुधार अभियान
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के टॉयलेट में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे जंजीर से बंधे मग को हटाकर आधुनिक जेट स्प्रे लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह बदलाव पहले चरण में उत्तर मध्य रेलवे (NCR) की 10 प्रमुख ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा।
🛠️ क्यों लिया गया यह फैसला?
यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायतों में से एक थी टॉयलेट फर्श पर जमा पानी, गंदगी और संक्रमण का खतरा। जंजीर से बंधा मग अक्सर फर्श पर गिर जाता था, जिससे:
• फर्श गीला रहता था
• बदबू और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ता था
• यात्रियों को असुविधा होती थी
रेलवे बोर्ड ने यात्रियों की नकारात्मक फीडबैक को गंभीरता से लेते हुए इस व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया।
🚿 अब कैसे काम करेगा जेट स्प्रे सिस्टम?
• टॉयलेट में सीधे वॉटर लाइन से जुड़ा जेट स्प्रे
• पानी सीधे टारगेट पर जाएगा
• फर्श पर पानी का फैलाव कम होगा
• सफाई और स्वच्छता बेहतर रहेगी
यह व्यवस्था बायो-टॉयलेट सिस्टम के साथ बेहतर तालमेल में काम करेगी।
🚉 किन ट्रेनों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट?
पहले चरण में 10 प्रमुख ट्रेनों को चुना गया है, जिनमें प्रयागराज एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, मुंबई दुरंतो, संगम एक्सप्रेस, कानपुर शताब्दी आदि शामिल हैं।
तीन महीनों तक यात्रियों की प्रतिक्रिया और रखरखाव रिपोर्ट का विश्लेषण किया जाएगा। सफल होने पर इसे देशभर की ट्रेनों में लागू किया जाएगा।
🧼 स्वच्छता अभियान से जुड़ा कदम
यह पहल भारतीय रेलवे के “स्वच्छ रेल–स्वच्छ भारत” मिशन का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में:
• बायो-टॉयलेट
• वैक्यूम सिस्टम
• बेहतर वाटर मैनेजमेंट
जैसे कई सुधार किए गए हैं।
📊 यात्रियों को क्या फायदा?
• साफ-सुथरा टॉयलेट
• फिसलन की समस्या कम
• संक्रमण का जोखिम कम
• आधुनिक और सुविधाजनक अनुभव
रेलवे का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सभी कोचों को अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जाए।