307 KM रेल नेटवर्क बढ़ेगा: DDU–झाझा, गोंदिया–जबलपुर और गम्हरिया–चांडिल में मल्टी-ट्रैकिंग को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने रेल मंत्रालय की तीन महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। लगभग ₹9,072 करोड़ की लागत वाली इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे नेटवर्क में 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
📍 किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी?
- पुनारख–किऊल तीसरी एवं चौथी लाइन
- गोंदिया–जबलपुर दोहरीकरण
- गम्हरिया–चांडिल तीसरी एवं चौथी लाइन
इन परियोजनाओं से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों को लाभ मिलेगा। लगभग 5,407 गांवों की करीब 98 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क प्राप्त होगा।
🚆 DDU–झाझा रेलखंड विस्तार योजना
पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU) से झाझा तक लगभग 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹17,000 करोड़ है।
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विभाजित किया गया है:
- DDU–दानापुर
- दानापुर–फतुहा
- फतुहा–बख्तियारपुर
- बख्तियारपुर–पुनारख
- पुनारख–किऊल
- किऊल–झाझा
पहले चरण में फतुहा–बख्तियारपुर (24 किमी) और बख्तियारपुर–पुनारख (30 किमी) को स्वीकृति मिल चुकी है। अब 50 किमी लंबे पुनारख–किऊल खंड को भी मंजूरी मिल गई है।
📈 क्यों जरूरी है मल्टी-ट्रैकिंग?
DDU–झाझा रेललाइन का निर्माण 1860-70 के दशक में हुआ था। समय के साथ यात्री और मालगाड़ियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई, जिससे ट्रैक क्षमता पर भारी दबाव पड़ा।
- समय पालन में कठिनाई
- रखरखाव में बाधा
- ट्रेनों की देरी
नई लाइनों के निर्माण से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होगा और अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन का मार्ग खुलेगा।
🏭 क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
- औद्योगिक विकास में तेजी
- रोजगार सृजन
- माल परिवहन क्षमता में वृद्धि
- संचालन लागत में बचत
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी और कनेक्टिविटी को नई दिशा देंगी।
यह निर्णय भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और नेटवर्क विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।