देहरादून रेलवे स्टेशन: तकनीकी विस्तार के साथ बढ़ी यात्री सुरक्षा और स्टेशन की क्षमता
देहरादून रेलवे स्टेशन ने पिछले 29 वर्षों में यात्री सुविधाओं और तकनीकी उन्नयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ब्रिटिश काल में बने इस स्टेशन को अब आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।
🚆 डीजल से इलेक्ट्रिक तक का सफर
पहले देहरादून से चलने वाली सभी ट्रेनें डीजल इंजन से संचालित होती थीं, लेकिन अब 100 प्रतिशत ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से चल रही हैं। इससे रेलवे को हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये के राजस्व की बचत हो रही है।
इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों के संचालन में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिचालन लागत में भी कमी आई है।
💺 एलएचबी कोच से बढ़ी सुरक्षा
वर्तमान में देहरादून से चलने वाली सभी 18 ट्रेनें लिंक हॉफमैन बुश (LHB) कोच के साथ संचालित हो रही हैं। ये कोच इंजन से सीधे बिजली प्राप्त करते हैं, जिससे ट्रेन खड़ी रहने पर भी एसी और अन्य सुविधाएं चालू रहती हैं।
एलएचबी कोच तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित हैं। दुर्घटना की स्थिति में कोच एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे नुकसान कम होता है।
📈 स्टेशन क्षमता में बढ़ोतरी
- कोच क्षमता 12 से बढ़ाकर 18 की गई
- 2017 में प्लेटफॉर्म संख्या 4 से बढ़ाकर 5 की गई
- सॉलिड इंटरलॉकिंग सिस्टम लागू
🛗 यात्री सुविधाओं में सुधार
- 2022 में प्रवेश द्वार पर एस्केलेटर की स्थापना
- कोच पोजिशन डिस्प्ले सिस्टम
- अत्याधुनिक प्रतीक्षालय
- 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे
⚠ कुछ सेवाएं हुईं प्रभावित
कोरोना काल के दौरान कुछ ट्रेनों को देहरादून से हटाकर हरिद्वार और ऋषिकेश से संचालित किया गया। इनमें देहरादून-वांद्रा एक्सप्रेस, देहरादून-उज्जैन/इंदौर, देहरादून-कोचिवल्ली, देहरादून-मदुरई और देहरादून-हावड़ा (13009/10) शामिल हैं।
हालांकि, वर्तमान में 18 ट्रेनें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं और स्टेशन की क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है।
🎯
देहरादून रेलवे स्टेशन तकनीकी उन्नयन, यात्री सुरक्षा और सुविधाओं के विस्तार के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिफिकेशन, एलएचबी कोच, बढ़ी प्लेटफॉर्म क्षमता और आधुनिक सुरक्षा उपायों ने इसे उत्तराखंड का एक आधुनिक रेल केंद्र बना दिया है।
