Home
🚆 Indian Railways | भारतीय रेल
Facebook Instagram YouTube Twitter

Gorakhpur Railway Signal Factory Inverter: रेलवे अब अपने इन्वर्टर से दे रहा ट्रेनों को सिग्नल – देशभर के 14 जोन में सप्लाई | Indian Railways Make in India Achievement 2026

▶ Ad Space - Title ke Neeche

 


Gorakhpur Railway Signal Factory Inverter: रेलवे अब अपने इन्वर्टर से दे रहा ट्रेनों को सिग्नल, गोरखपुर में बनी मशीनें चला रहीं देशभर की ट्रेनें

भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पूर्वोत्तर रेलवे का गोरखपुर स्थित सिग्नल कारखाना अब न केवल रूट रिले और प्वाइंट मशीनें बना रहा है, बल्कि अब खुद के बनाए इन्वर्टर (बैटरी चार्जर) से समपार फाटकों पर ट्रेनों को निर्बाध सिग्नल दे रहा है। यह Make in India का एक शानदार उदाहरण है जो पूरे देश के रेल संचालन को और अधिक सुरक्षित बना रहा है।

Gorakhpur Railway Signal Factory Inverter क्या है और क्यों है खास?

समपार फाटकों (Level Crossing Gates) पर जब बिजली चली जाती है, तो पहले सिग्नल सिस्टम ठप हो जाता था। लेकिन अब गोरखपुर सिग्नल कारखाने में निर्मित इन्वर्टर लग जाने से पावर कट के बावजूद सिग्नल प्रणाली पूरी तरह चालू रहती है। ट्रेनें बिना किसी रुकावट के निर्धारित समय पर चलती रहती हैं।

Gorakhpur Railway Signal Factory Inverter उत्पादन के आंकड़े

गोरखपुर सिग्नल कारखाने में इन्वर्टर उत्पादन लगातार बढ़ रहा है:

  • ✅ वर्ष 2024-25 में — 15 इन्वर्टर बनाए गए
  • ✅ वर्ष 2025-26 में — 28 इन्वर्टर बनाए गए
  • ✅ ये सभी इन्वर्टर देशभर के विभिन्न समपार फाटकों पर लगाए जा चुके हैं
  • ✅ आने वाले समय में मांग के अनुसार और अधिक इन्वर्टर बनाए जाएंगे

Gorakhpur Railway Signal Factory: रिकॉर्ड उत्पादन 2025-26

गोरखपुर स्थित पूर्वोत्तर रेलवे के सिग्नल कारखाने ने वर्ष 2025-26 में उत्पादन का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है:

  • 🔧 2,066 इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीनें — ट्रेनें इन्हीं मशीनों से पटरी बदलती हैं
  • 📡 14,060 सिग्नल रिले — ट्रेनों को रेड, यलो, ग्रीन सिग्नल इन्हीं से मिलता है
  • 📦 2,302 ऑपरेटस केस — सिग्नल उपकरणों की सुरक्षा के लिए
  • 🔋 28 इन्वर्टर (बैटरी चार्जर) — पावर बैकअप के लिए

Gorakhpur Railway Signal Factory से देशभर के 14 रेलवे जोन को सप्लाई

गोरखपुर कारखाने में बने उपकरण अब पूरे भारतीय रेलवे के लगभग सभी जोन में सप्लाई किए जा रहे हैं:

  • ✅ पूर्वोत्तर रेलवे
  • ✅ पूर्व रेलवे
  • ✅ पश्चिम रेलवे
  • ✅ उत्तर रेलवे
  • ✅ दक्षिण रेलवे
  • ✅ मध्य रेलवे
  • ✅ उत्तर मध्य रेलवे
  • ✅ पूर्व मध्य रेलवे
  • ✅ पश्चिम मध्य रेलवे
  • ✅ दक्षिण मध्य रेलवे
  • ✅ दक्षिण पूर्व रेलवे
  • ✅ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे
  • ✅ दक्षिण पश्चिम रेलवे
  • ✅ उत्तर पश्चिम रेलवे
  • ✅ पूर्व तटीय रेलवे

81 साल पुराना है गोरखपुर सिग्नल कारखाना

पूर्वोत्तर रेलवे का यह सिग्नल कारखाना 10 नवंबर 1944 को स्थापित हुआ था। शुरुआत में मात्र 20 कर्मचारी थे। नवंबर 1958 में इसे गोरखपुर कैंट में स्थानांतरित किया गया और 120 स्टाफ के साथ काम शुरू हुआ। आज यह कारखाना पूरे भारत को सिग्नल उपकरण सप्लाई करने वाला अग्रणी केंद्र बन चुका है।

सिग्नल सिस्टम कैसे काम करता है?

ट्रेनों को सिग्नल देने के लिए पटरियों के किनारे वायर बिछाए जाते हैं। इन वायर को प्वाइंट मशीन और रिले से जोड़ा जाता है। इसके बाद ऑटोमेटिक सिग्नल काम करने लगता है। जहां पावर बैकअप नहीं था, वहां अब गोरखपुर निर्मित इन्वर्टर लगाए जा रहे हैं ताकि सिग्नल कभी भी बाधित न हो।

रेलवे की उपलब्धि — मुख्य जनसंपर्क अधिकारी का बयान

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि सिग्नल कारखाना में सिग्नलिंग रिले, इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन (EPM), ऑपरेटस केस, इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर (ELB) के अलावा बैटरी चार्जर (इन्वर्टर) का भी उत्पादन हो रहा है। इनकी सप्लाई पूर्वोत्तर रेलवे समेत अन्य जोन के लिए भी की जा रही है। महाप्रबंधक के दिशा-निर्देश पर इन उपकरणों को तकनीकी रूप से और अधिक समृद्ध किया जा रहा है।

यात्रियों को क्या फायदा?

  • 🟢 पावर कट में भी ट्रेनें समय पर चलेंगी
  • 🟢 सिग्नल फेलियर से होने वाली देरी में भारी कमी आएगी
  • 🟢 रेल यात्रा और अधिक सुरक्षित होगी
  • 🟢 देशभर के समपार फाटक अब 24x7 सुरक्षित रहेंगे
▶ Ad Space - Post ke Neeche
📰 Agli Khabar
🕒 Khabar load ho rahi hai...